बाराबंकी। जिले से सामने आई एक तस्वीर ने डिजिटल इंडिया और सरकारी योजनाओं के जमीनी हालात पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला बैंकी ब्लॉक के टिंडोला बरेठी गांव का है, जहां एक युवक को अपने बीमार माता-पिता के लिए खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर हासिल करने में भारी संघर्ष करना पड़ा।
जिले से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। बैंकी ब्लॉक के टिंडोला बरेठी गांव निवासी अरुण कुमार को अपने गंभीर रूप से बीमार माता-पिता के लिए गैस सिलेंडर पाने के लिए घंटों संघर्ष करना पड़ा।
अरुण, जो शाहजहांपुर में माली का काम करते हैं, परिवार के इकलौते कमाने वाले हैं। उनके पिता कैंसर से पीड़ित हैं, जबकि मां ब्रेन हैमरेज के बाद बिस्तर पर हैं। घर में दो छोटी बेटियां भी हैं। बताया जा रहा है कि गैस खत्म होने के बाद 4-5 दिन पहले सिलेंडर बुक कराया गया था, लेकिन समय पर डिलीवरी नहीं हुई। मजबूरी में अरुण 200 किलोमीटर दूर से गांव पहुंचे और तड़के 3 बजे घर से निकलकर करीब 8 किलोमीटर पैदल चलकर गैस एजेंसी पहुंचे। एजेंसी खुलने से पहले ही लंबी कतार लग चुकी थी। करीब 9 घंटे तक इंतजार करने के बाद दोपहर में उन्हें सिलेंडर मिल सका, तब जाकर घर में चूल्हा जल पाया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि अरुण को सिलेंडर उपलब्ध करा दिया गया है और भविष्य में किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए उन्हें सीधा संपर्क नंबर भी दिया गया है।







