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गेंदे की खुशबू से महकी सलिता की जिंदगी, बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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सिंगरौली। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को संभालने के लिए बैढ़न विकासखंड के ग्राम छतौली की रहने वाली सलिता प्रजापति ने जो कदम उठाया, वह आज उनकी सफलता की पहचान बन गया है। गेंदा फूल की खेती ने न सिर्फ उनकी आय बढ़ाई, बल्कि उन्हें गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना दिया।

कभी गेहूं और धान जैसी पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाला सलिता का परिवार सीमित आय के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था। वर्ष 2018 में उन्होंने आकाश स्व सहायता समूह से जुड़कर नई संभावनाओं की तलाश शुरू की। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कृषि विशेषज्ञों से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने कम लागत और कम पानी में तैयार होने वाली गेंदा फूल की खेती अपनाई। शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और बाजार की मांग को समझते हुए सलिता ने अपनी मेहनत जारी रखी। बैढ़न और सिंगरौली के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ शादी-विवाह और त्योहारों में गेंदे के फूलों की बढ़ती मांग ने उनकी मेहनत को सफलता में बदल दिया। नियमित बिक्री से उन्हें लगातार आय मिलने लगी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। आज सलिता की व्यक्तिगत मासिक आय 10 से 11 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि परिवार की कुल आय 12 से 14 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है। उन्होंने उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने परिवार की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। अब सलिता प्रजापति एक सफल महिला किसान और आजीविका सखी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, नई सोच और दृढ़ संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।

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