नोएडा। नोएडा की विशेष POCSO अदालत ने दुष्कर्म के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे 68 वर्षीय बुजुर्ग को 10 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा।
नोएडा की विशेष POCSO अदालत ने दुष्कर्म के आरोपों में घिरे 68 वर्षीय बुजुर्ग को 10 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा।
यह मामला वर्ष 2016 का है, जब Sector 20 Police Station में एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में एक आरोपी के नाबालिग पाए जाने पर उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि बुजुर्ग आरोपी के खिलाफ POCSO कोर्ट में सुनवाई जारी रही। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके माता-पिता, जांच अधिकारी और मेडिकल टीम सहित पांच गवाह पेश किए, लेकिन इनमें से कोई भी आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत नहीं दे सका। वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच पुराना संपत्ति विवाद था, जिसके चलते उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि घटना के समय बुजुर्ग शहर से बाहर अपनी बीमार मां की देखभाल कर रहे थे।







