best news portal development company in india

नई लेबर कोड लागू होने पर भी EPF व्यवस्था में तुरंत बदलाव नहीं: सरकार

SHARE:

नेशनल डेस्क। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि नई लेबर कोड व्यवस्था लागू होने के बाद भी फिलहाल कर्मचारी भविष्य निधि की मौजूदा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार के अनुसार Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) की वर्तमान प्रणाली कुछ समय तक पहले की तरह ही जारी रहेगी। राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री Shobha Karandlaje ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी Employees’ Provident Fund Scheme, 1952 के तहत चल रही EPF स्कीम तत्काल प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि EPF जमा पर मिलने वाली ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया पहले से तय नियमों के अनुसार ही जारी रहेगी।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई लेबर कोड व्यवस्था लागू होने के बाद भी कर्मचारी भविष्य निधि की मौजूदा प्रणाली में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार के अनुसार Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) की वर्तमान व्यवस्था कुछ समय तक पहले की तरह ही जारी रहेगी।

राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री Shobha Karandlaje ने बताया कि नई श्रम सुधार व्यवस्था लागू होने के बाद भी Employees’ Provident Fund Scheme, 1952 के तहत चल रही EPF स्कीम तत्काल प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि EPF जमा राशि पर मिलने वाली ब्याज दर तय करने का प्रावधान पहले से मौजूद नियमों के अनुसार ही किया जाता है।

सरकार ने बताया कि EPF खातों पर ब्याज दर तय करने का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार करती है, लेकिन इससे पहले Central Board of Trustees, EPFO की सलाह ली जाती है। इस बोर्ड में सरकार, कर्मचारियों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ब्याज दर तय करते समय EPFO के निवेश से होने वाली आय और फंड की वित्तीय स्थिति को भी ध्यान में रखा जाता है।

सरकार के मुताबिक नई श्रम सुधार व्यवस्था के तहत लागू होने वाला Code on Social Security, 2020 भी EPF प्रणाली की मूल संरचना को बरकरार रखता है। जब यह कोड लागू होगा, तब भी मौजूदा EPF स्कीम एक वर्ष तक या तब तक जारी रहेगी, जब तक कि वह नए कानून के प्रावधानों से टकराव में न आए।

इस कोड का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एक साथ लाकर उन्हें सरल बनाना है। इसके तहत Employees’ State Insurance Act, 1948, Payment of Gratuity Act, 1972 और Maternity Benefit Act, 1961 जैसे कई कानूनों को एक ही ढांचे में शामिल किया गया है।

सरकार ने कहा कि फिलहाल EPF खाताधारकों को किसी बड़े बदलाव की चिंता करने की जरूरत नहीं है और भविष्य में यदि कोई बदलाव किए जाते हैं तो उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए EPF रिटायरमेंट बचत का भरोसेमंद आधार बना रहेगा।

Leave a Comment