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माता मुंडेश्वरी मंदिर में अनोखी परंपरा, बिना रक्त बहाए दी जाती है बकरे की बलि

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बिहार। माता मुंडेश्वरी मंदिर कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड स्थित पावरा पहाड़ी पर विराजमान यह प्राचीन मंदिर देश की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों में विशेष स्थान रखता है। अष्टकोणीय संरचना वाला यह मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और मान्यताओं के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में माता मुंडेश्वरी के साथ भगवान शिव ‘महामंडलेश्वर’ रूप में विराजमान हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार शिवलिंग दिन में तीन से चार बार रंग बदलता है, जो यहां की सबसे बड़ी रहस्यमयी विशेषताओं में गिना जाता है।

माता मुंडेश्वरी मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड स्थित पावरा पहाड़ी पर विराजमान माता मुंडेश्वरी मंदिर अपनी प्राचीनता और अनोखी परंपराओं के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। अष्टकोणीय संरचना वाला यह मंदिर देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर परिसर में माता मुंडेश्वरी के साथ भगवान शिव ‘महामंडलेश्वर’ रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग दिन में तीन से चार बार अपना रंग बदलता है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था और रहस्य का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की सबसे विशेष परंपरा ‘अहिंसक बलि’ है। यहां बकरे की बलि बिना रक्त बहाए दी जाती है। चावल और फूल (अक्षत) से स्पर्श कर बकरे को अर्पित किया जाता है, जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी दुर्लभ परंपरा मानी जाती है। नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

मंदिर के पुजारी राधेश्याम के अनुसार यह मंदिर पावरा पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन धरोहर है और यहां की परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। 21 स्थानों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए हैं। मंदिर की सजावट के लिए थाईलैंड से फूल मंगाए गए हैं, जबकि पश्चिम बंगाल के कारीगर सजावट में जुटे हैं। नवमी के दिन मंदिर 24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। आस्था, परंपरा और रहस्य का अद्भुत संगम माने जाने वाला यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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