सिंगरौली। जिले में पानी को लेकर हालात अब चेतावनी के स्तर पर पहुंच चुके हैं। गौरव बैनल द्वारा पूरे जिले को ‘जल अभावग्रस्त’ घोषित करना सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि आने वाले संकट का संकेत है।
खास बात यह है कि इस साल सामान्य से ज्यादा बारिश होने के बावजूद भू-जल स्तर का गिरना चिंताजनक है। इसका सीधा मतलब है कि हम पानी का इस्तेमाल नहीं, बल्कि दोहन कर रहे हैं। नए नलकूप खनन पर रोक लगाना एक जरूरी कदम है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। असली चुनौती है—जल संरक्षण की आदत विकसित करना। जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक ऐसे प्रतिबंध सिर्फ अस्थायी राहत ही दे पाएंगे। गांवों और शहरों में बिना योजना के नलकूप खोदने की प्रवृत्ति ने स्थिति को और बिगाड़ा है। सरकारी जल स्रोतों के आसपास भी निजी बोरिंग होना बताता है कि नियमों की अनदेखी पहले से ही होती रही है। अब 150 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लगाना इस अव्यवस्था को नियंत्रित करने की कोशिश है। जरूरत है कि प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक भी जिम्मेदारी निभाएं। वर्षा जल संचयन, पानी की बर्बादी रोकना और सामूहिक प्रयास ही इस संकट से बचा सकते हैं। वरना आने वाले समय में ‘जल संकट’ सिर्फ खबर नहीं, हकीकत बन जाएगा।







