नेशनल डेस्क। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार की एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण और गर्भवती होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को पीड़िता की मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए मामले की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी के कथित यौन शोषण और गर्भवती होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पीड़िता की मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट तत्काल पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की जांच पर भी सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अब तक मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने रांची के न्यायिक आयुक्त को न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच रिपोर्ट भी पेश करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से डीजीपी और आईजी (कारागार) के हलफनामे दाखिल किए गए, लेकिन अदालत ने उन्हें संतोषजनक नहीं माना। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। मामला उस महिला कैदी से जुड़ा है, जिसने जेल अधीक्षक पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। मीडिया में सामने आई खबरों के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है और सभी संबंधित रिपोर्ट समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए। इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी, जहां मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला सामने आने के बाद राज्य की जेल व्यवस्था और महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।







