नेशनल डेस्क। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने शुक्रवार को नया इतिहास रच दिया। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन ‘मिशन आगमन’ में शानदार सफलता हासिल करते हुए कई ग्राहकों के उपग्रहों और पेलोड को सफलतापूर्वक 450 किलोमीटर की निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। रॉकेट का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने अंतरिक्ष विज्ञान में नई उपलब्धि हासिल करते हुए इतिहास रच दिया है। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन ‘मिशन आगमन’ में सफलतापूर्वक कई उपग्रहों और पेलोड को 450 किलोमीटर ऊंची निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। रॉकेट का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। इस सफलता के साथ भारत निजी कंपनी के जरिए ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया। मिशन के दौरान विभिन्न ग्राहकों के उपग्रहों के साथ इन-ऑर्बिट प्रयोग भी सफलतापूर्वक पूरे किए गए। विक्रम-1 की पहली ही उड़ान की सफलता की तुलना स्पेसएक्स के फाल्कन-1 रॉकेट से की जा रही है, जिसे पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने में चार प्रयास करने पड़े थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है और इससे देश के स्पेस सेक्टर को नई गति मिलेगी। यह सफलता भारत के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को भी मजबूती देती है, जिसके तहत वर्ष 2033 तक देश अपनी स्पेस इकोनॉमी को 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि स्काईरूट एयरोस्पेस के सामने अब इस तकनीकी सफलता को व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं में बदलने और वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने की चुनौती होगी।







