सिंगरौली/बलरामपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस ने बैरियर तोड़कर जवानों को कुचलने की कोशिश करने वाले चर्चित शराब तस्करी मामले में 45 दिन बाद बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने मुख्य आरोपी देवनंदन कुशवाहा के साथ बैढ़न स्थित कचनी शराब भट्टी के मैनेजर मृत्युंजय जायसवाल को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने 22 अप्रैल को बैरियर तोड़कर जवानों को कुचलने की कोशिश करने वाले चर्चित शराब तस्करी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी देवनंदन कुशवाहा और बैढ़न स्थित कचनी शराब भट्टी का मैनेजर मृत्युंजय जायसवाल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार 22 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश के बैढ़न क्षेत्र से शराब लेकर जा रही एक बोलेरो को तुगवा बैरियर पर रोकने का प्रयास किया गया था। चालक ने वाहन रोकने के बजाय बैरियर तोड़ दिया और जवानों को कुचलने की कोशिश करते हुए फरार हो गया। घटना के बाद रघुनाथनगर और बलांगी पुलिस ने घेराबंदी की, लेकिन आरोपी वाहन छोड़कर भाग निकले थे। करीब 45 दिनों तक फरार रहने के बाद साइबर टीम की मदद से मुख्य आरोपी देवनंदन कुशवाहा को झारखंड के गढ़वा जिले से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने बैढ़न स्थित कचनी शराब भट्टी से लगभग 94 हजार रुपये की शराब खरीदी थी और इस सौदे में भट्टी के मैनेजर मृत्युंजय जायसवाल की भूमिका थी। पुलिस ने आरोपी के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मृत्युंजय जायसवाल को भी गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले के सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में शराब की सप्लाई हुई, तो उसकी निगरानी और रिकॉर्ड व्यवस्था की जांच होना चाहिए। लोगों ने यह भी मांग की है कि शराब की बिक्री, परिवहन और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराई जाए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। वहीं इस कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित शराब कारोबार को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रहती है या पूरे नेटवर्क की परतें भी खुलती हैं।







