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धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना पर उठे सवाल, ग्राम सभा मंजूरी में फर्जीवाड़े के आरोप

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सिंगरौली। जिले की सरई तहसील में प्रस्तावित धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना अब बड़े विवाद में घिर गई है। ग्रामीणों ने ग्राम सभा की मंजूरी प्रक्रिया में गंभीर फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए कहा है कि आदिवासियों को बिना जानकारी दिए अंगूठे लगवाए गए, जबकि कई मृत लोगों के नाम तक दस्तावेजों में शामिल कर लिए गए।

जिले की सरई तहसील में प्रस्तावित धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने ग्राम सभा की मंजूरी प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आदिवासियों को बिना जानकारी दिए अंगूठे लगवाए गए और मृत लोगों के नाम तक दस्तावेजों में शामिल कर लिए गए। जानकारी के अनुसार, धिरौली कोल ब्लॉक के तहत Stratatech Mineral Private Limited को करीब 2672 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। इस परियोजना से 1435.35 हेक्टेयर जंगल प्रभावित होगा और 5 लाख 70 हजार 666 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। परियोजना से 8 गांव प्रभावित होंगे तथा लगभग 2974 परिवारों के विस्थापन की आशंका है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में सामने आया कि वर्ष 2021 में मझौली पाठ, झलरी और धिरौली पंचायतों में आयोजित ग्राम सभाओं में जमीन डायवर्जन के प्रस्ताव पारित किए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम बासी बेरदहा के रजिस्टर में नंदलाल सिंह खैरवार का अंगूठा दर्ज मिला, जबकि उनकी मौत वर्ष 2014 में हो चुकी थी। इसी तरह सुखवारिया खैरवार का नाम भी दस्तावेजों में पाया गया, जिनका निधन 2017 में हो चुका था। ग्रामीण अखिलेश शाह ने आरोप लगाया कि लोगों को गुमराह कर पुश्तैनी जमीनें छीनी जा रही हैं और कई फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। वहीं समारु सिंह मरकाम का कहना है कि जंगल खत्म होने से आदिवासियों की जिंदगी और रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों ने लगातार पेड़ कटाई और मकान खाली कराने की धमकियों का भी आरोप लगाया है। दूसरी ओर पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर जंगल कटने से वन्यजीवों का अस्तित्व भी प्रभावित होगा।

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