अफगानिस्तान। तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को कानूनी मान्यता देने वाला नया कानून लागू किया है। इस कानून के तहत पति अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक रूप से दंडित कर सकता है, जब तक हड्डी न टूटे या खुला घाव न बने।
अफगानिस्तान में तालिबान ने महिलाओं पर घरेलू हिंसा को कानूनी संरक्षण देने वाला नया कानून लागू कर दिया है। इस कानून के तहत पति अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक दंड दे सकता है, जब तक हड्डी न टूटे या शरीर पर खुला घाव न बने। कानून के अनुसार, महिला को अपनी चोटें अदालत में दिखाने के लिए पूरी तरह ढका होना जरूरी है और उसके साथ पति या कोई पुरुष अभिभावक उपस्थित होना चाहिए। अगर महिला बिना पति की अनुमति घर छोड़ती है तो उसे तीन महीने तक जेल हो सकती है। इस कानून में सामाजिक वर्ग भी सजा तय करने का आधार है। उच्च वर्ग और धार्मिक विद्वानों को कम सजा, जबकि निचले वर्ग के व्यक्ति को जेल और शारीरिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि रीम अलसालेम ने नए कानून की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह महिलाओं और लड़कियों के लिए खतरनाक है और अफगान समाज में उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है। तालिबान ने इस कानून पर चर्चा करना भी अपराध घोषित कर दिया है, जिससे लोग इसके खिलाफ आवाज उठाने से डर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।






